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मेरे अल्फाज़

आदमी ज़िंदा है पर लाश है यारों

कवि आमद

14 कविताएं

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ऐसा जहाँ आस-पास है यारो
दिल दुखी मन उदास है यारो

बड़ा अजीब है, बहू सोती है,औ
पोंछा लगाती अब सास है यारो

फूले हैं सभी पांच सौ के नोटों पे
किसे किसकी यहां आस है यारो

जहां देखो वहां हैं दारू पार्टियां
कहाँ अब कान्हा का रास है यारो

कौन करे है याद ऐहशान पिछले
जो पिलादे वही खास है यारो

'आमद'है कौन जुर्म के खिलाफ
आदमी जिंदा है पर लाश है यारो

रचनाकार - के.के.सिंह आमद साधुपुरी
साहित्य स्रजन मंच, फिरोजाबाद

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