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मेरे अल्फाज़

क्यों बुरे फंसे भाई जान

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मेरी रचना का शीर्षक है-
    बुरे फंसे भाई जान- 

अरे बुरे फंस गए भाई जान
लूट-पाट कराए पाकिस्तान

समूचा भारत एक साथ खड़ा
फिर कांग्रेसी क्यों अलग खड़ा

वतन प्यारा है या पाकिस्तान
पार्टी से आ रहा खुला बयान

क्या पाकिस्तान, पाकिस्तान
हां भूख से तड़पते भाई जान

मोदी नीति है, पक्का लोहा
जन-मानस संसार को मोहा

एक आखिरी उम्मीद बची थी
महात्मा ने जिसको सींची थी

ओ खूब सूरत कश्मीर कली थी
ताबूत में आखिरी कील बची थी

क्या तीन सौ सत्तर, तीन सौ सत्तर
कश्मीर को किया था बद से बद्तर

पाकिस्तान चला था अकड़ा-अकड़ा
लेकिन एक झटके में हो गया लंगड़ा

कवि- पं. अमरेश उपाध्याय



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