आपका शहर Close
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Pyar ka Jalan

मेरे अल्फाज़

प्यार की जलन

89 Views
प्यार में धीरे-धीरे जलना अच्छा लगता है।
ख़ुद कहना ख़ुद सुनना अच्छा लगता है।

कुछ भी ख़ास नही मुझमें फिर भी जाने क्यूँ,
भीड़ से कटकर तनहा चलना अच्छा लगता है।
धीरे-धीरे प्यार में जलना अच्छा लगता है।

मख़मल के नर्म गलीचे भी चुभने लगते हैं,
तेरे ख़ातिर धूप में चलना अच्छा लगता है।
प्यार में धीरे-धीरे जलना अच्छा लगता है,
ख़ुद कहना ख़ुद सुनना अच्छा लगता है।

तेरे ख़ातिर दिन भर भूखा रहता हूँ मैं,
तेरे ख़ातिर दिन भर काम करता हूँ मैं।
तेरे ख़ातिर हर पल थकना अच्छा लगता है,
तेरे ख़ातिर रातभर जगना अच्छा लगता है।

ख़ुद कहना ख़ुद सुनना अच्छा लगता है।
प्यार में धीरे-धीरे जलना अच्छा लगता है।

अमित"अंजान"
प्रयागराज
U.P.



हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!