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मेरे अल्फाज़

हमारे पाठक विशाल सिंह कहते हैं- दिल गुनाहों से भर गया साहिब

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"दिल गुनाहों से भर गया साहिब
जर्फ़ लोगों का मर गया साहिब

बज़्म-ए-जालिम में हमने देखा है
सच के कहने पे सर गया साहिब

इन अंधेरों को देखकर ख़ुद ही
अपने साये से डर गया साहिब

मै ख़ताओ का एक पैकर हूँ.
मुझपे तोहमत वो धर गया साहिब

उँचे महलों को छोड़ कर ताबिश
टूटे-फूटे से घर गया साहिब."

- विशाल सिंह ताबिश 

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