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Jite ni nahi hoti kadra

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जीते जी नहीं होती कद्र

Gk Agni

17 कविताएं

54 Views

जीते जी नही होती कद्र
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जिन्दों की कद्र नही करते हैं दुनिया वाले
मुर्दो को उठाने के लिए भीड़ जुटती है

-गीतेश अग्निहोत्री

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