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Banaras-Ek-Ishq

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बनारस-एक-इश्क

Amit Mira

3 कविताएं

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मैं चाय लिखूं,
तुम फुटपाथ (लंका) समझना !
मैं अड्डा लिखूं,
तुम भीटी समझना !
मैं जीवन लिखूं,
तुम मणिकर्णिका, हरिश्चन्द्र समझना !
मैं सुकून लिखूं,
तुम गंगा किनारे समझना !
मैं नाव लिखूं,
तुम मल्लाह समझना !
मैं रात लिखूं,
तुम अस्सी घाट समझना !
मैं रेडियो लिखूं,
तुम रेड एफ एम समझना !
मैं सर्वविद्या की राजधानी लिखूं,
तुम बीएचयू समझना !
मैं लस्सी लिखूं,
तुम रामनगर समझना !
मैं चिलम लिखूं,
तुम महादेव समझना !
मैं खुदा और भगवान लिखूं,
तुम ज्ञानवापी (पुराना विश्वनाथ जी) समझना !
मैं कैंट लिखूं,
तुम शिवगंगा और बेगमपुरा समझना !
मैं इश्क़ लिखूं,
तुम बनारस समझना

-अमित

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