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समय से बाख़बर अवधी रचनाकार उमेश चौहान की कविताई...

मैं इनका मुरीद

समय से बाख़बर अवधी रचनाकार उमेश चौहान की कविताई... 

शैलेन्द्र कुमार शुक्ल, वर्धा

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उमेश चौहान को गुजरे तीन बरस बीत गए ! उनसे मुलाक़ात कभी नहीं हो पाई लेकिन उनकी कविताओं ने उन्हें बेशुमार याद रखा। उनसे फोन पर अवधी में ही बातें हुईं, इतना सहज व्यक्तित्व कि वे सिविल ऑफिसर भी थे, कभी लगा ही नहीं। उनके निधन के बाद ही जाना कि वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (1986) केरल कैडर के अधिकारी थे।  उनका जन्म लखनऊ जिले के दादूपुर गाँव में 9 अप्रेल 1959 में हुआ था। अवध के किसान परिवार में जन्में उमेश चौहान अपने परिवेश और भाषा को सिद्दत से प्यार करते थे। इसका प्रमाण है उनकी अवधी में लिखी कविताएं। उन्होंने हिंदी में भी काव्य और गद्य लेखन किया, जिसके लिए वह सम्मानित भी हुए। 'गाँठ में लूँ बाँध थोड़ी चाँदनी', 'दाना चुगते मुरगे', 'जिन्हें डर नहीं लगता', 'जनतंत्र का अभिमन्यु' उनके काव्य संग्रह हैं। उनका अवधी का कोई स्वतंत्र कविता संग्रह नहीं है । इनकी अवधी कविताएं हिंदी के काव्य-संग्रहों में ही संकलित हैं। आज हम उनकी अवधी कविताओं पर कुछ बात करेंगे। 
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