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शेख मुसलिदुद्दीन सादी: जिनके 'गुलिस्तां' में ख़ुदा को खुश रखने का जरिया है

Sheikh musliduddin saadi persian poet
                
                                                                                 
                            

ईरान में जन्मे शेख सादी (शेख मुसलिदुद्दीन सादी) फारसी भाषा के सुप्रसिद्ध कवि थे। वर्ष 1258 ईस्वी में उन्होंने गद्य में 'गुलिस्तां' नामक कृति लिखी, जिसमें संपूर्ण मानव जाति के लिए कई तरह की सलाह हैं। 



फरीदूं के महल की दीवार पर लिखा था- 'ऐ भाई! दुनिया ने कभी किसी का साथ नहीं  दिया। तू दुनिया को बनाने वाले से दिल लगा और संतोष कर। दुनिया की हुकूमत पर भरोसा न कर।' नीच को सुधारने में तू अपना समय नष्ट मत कर। दुष्ट व्यक्ति को सुधारना ऐसा ही है, जैसे गोल गुबंद पर अखरोट रोकने की कोशिश। दुष्ट के साथ भलाई करना, उतना ही बुरा है, जितना सज्जनों के साथ दुष्टता करना। माफ कर देना एक अच्छी बात है, लेकिन दुनिया को सताने वाले के जख्म पर मरहम नहीं लगाना चाहिए। जिस मेहरबान ने कदम-कदम पर तुझ पर मेहरबानी की हो, यदि वह तमाम उम्र में तुझ पर एक जुल्म भी कर दे, तो उसे माफ कर देना चाहिए। हकीम लुकमान से  लोगों ने पूछा, 'तूने अदब किससे सीखा?' वे बोले, 'बे-अदबों से।' लोगों ने पूछा, 'वह कैसे?' 

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4 years ago

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