विज्ञापन

इंक़लाब का ऐसा शायर जिसे काग़ज-कलम की ज़रूरत न थी

Poet of Inqlab Habeeb Jalib
                
                                                                                 
                            हबीब जालिब आम नागरिक के शायर थे। अपनी इंक़लाबी नज़्मों से उन्होंने तानाशाही हुकूमत को ख़ूब बेनक़ाब किया। जालिब का जन्म 1928 में पंजाब में हुआ, जवानी के दौर में उन्होंने भारत का बंटवारा देखा। वह इस बंटवारे को नहीं मानते थे लेकिन परिवार के कारण उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ा। 1959 में जनरल अय्यूब ख़ान पाकिस्तान में मार्शल लॉ चला रहा था। उस दौरान रावलपिंडी रेडियो से एक मुशायरा प्रसारित हुआ। ज़्यादातर शायरों ने आशिक़ी और महबूबा पर ग़ज़लें पढ़ीं, पाकिस्तान की तारीफ़ों की नज़्में गायी गईं। फिर आए हबीब जालिब जिन्होंने अफ़सरों के हुक़्म को सिरे से नकारते हुए पाकिस्तान के असल हालातों और दहशत के आलम पर पढ़ना शुरू किया।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
                        आगे पढ़ें
                        

झूठ बोलने वाली हुकुमत के होश उड़ गए

1 week ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X