आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Main Inka Mureed ›   Meeraji Famous shayar important signature of modern Urdu Nazm
मीराजी

मैं इनका मुरीद

इश्क़ में डूबे एक शायर का मीरा हो जाना...

तसनीफ़ हैदर, नई दिल्ली

10831 Views
मीरा जी उर्दू के एक शायर थे, 1912 में 25 मई को पैदा हुए। मुझे बेहद पसंद हैं, पसंद सिर्फ़ इसलिए नहीं क्यूंकि अज़्मतुल्लाह ख़ान की तरह उन्होंने भी उर्दू को फ़ारसी अरबी लफ़्ज़ियात के फेर से निकाल कर उसे अपनी जड़ों यानी हिंदी ज़बान और तहज़ीब के नज़दीक किया बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने इश्क़ पर अपना सब कुछ वार दिया और पहचाने गए हवस के जज़्बे की वजह से। उन्होंने एक नज़्म में लिखा है-

क्या इश्क़ जो इक लम्हे का हो 
वो इश्क़ नहीं कहलायेगा 
तुम उसको हवस क्यों कहते हो 


उनका असली नाम सना उल्लाह डार था, मगर पहचाने गए मीरा जी के नाम से। वजह ये थी कि एक बंगाली लड़की से उन्हें इश्क़ होगया था जिसका नाम मीरा था। सो मीरा जी ने अपने नाम में उसे शामिल करके अपने साथ उसे भी अमर कर दिया। बड़ी दिलचस्प और अलग शख़्सियत थी उनकी। जोगी भी थे और रोगी भी।  आगे पढ़ें

इश्क़ और वस्ल से भरी नज़्में

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!