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कई ऐसे भी शायर हैं जिन्होंने मंचों को नहीं स्वीकारा, बस सीधे पाठकों के दिल के दरवाजें पर दस्तक दी

शायरी की मुंढ़ेर पर रखा उम्मीद का नया ‘दीप’।
                
                                                                                 
                            लाॅकडाउन के समय बहुत सारे शायर और कवि फेसबुक की आभासी दुनिया में नुमाया हुए हैं। विचित्र प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे अद्भुत प्रयोग कि समझने और समझाने वाले के पास अल्फ़ाज़ ख़त्म हो जाएंगे फिर भी मतलब न समझ में आए। शायरी अपने दौर के साथ बहती है, लेकिन सामईन जब-जब कमजोर पड़ा है, शायरी के मेयार गिरे हैं। 
                                                                                                


नए दौर में ऐसे शायरों की बेहद कमी हैं जिनकी शायरी में सैकड़ों शेड हों, हां ऐसे शायरों की कमी नहीं जिनके चेहरों पर कई शेड का मेकअप हो। इस दौर में असली शायरी को तलाश पाना मुश्किल है। लेकिन शायरी पसंद लोग अपनी भूख को मिटाने के लिए ऐसे शायरों की तलाश कर लेते हैं जो शायरी को जी रहे हैं। 
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1 month ago

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