ख़ूब पहचान लो ‘असरार’ हूं मैं… असरार उल हक़ मजाज़

Asrar ul haq majaz the poet of romanticism and revolution
                
                                                             
                            
किसी माशूक के ख़तों में इन्क़लाबी आग लगा देने के बाद हवा में जो ख़ुशबू रवां होगी उसका नाम होगा ‘असरार उल हक़ मजाज़’ और इस हवा की कैफ़ियत है कि यह जितनी नशातअंगेज़ महसूस होती है उतनी ही ग़मज़दा भी है जिसे ग़ालिबन किसी ग़मख्वार की ज़रूरत भी हो।


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बोल अरी ओ धरती बोल

4 weeks ago

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