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मैं इनका मुरीद

खाली किताब के पन्ने

suraj chaudhary

14 कविताएं

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तब से हम थे प्यार में,
ये दूसरा कौन आ गया।
खाली किताब के पन्ने,
ये कौन भरता चला गया॥
कौन सी बात जो तुमको चुभती चली गयी,
बिन बात पूछे, तू बताती क्यों चली गयी।
आँखों में है नीद, पर वास्तव में आती नहीं,
कौन सी रात जो काटे कटती नहीं ॥
तबसे थी उम्मीद दिल में,
ये कौन मिटाता चला गया।
खाली किताब के पन्ने,
ये कौन भरता चला गया॥
तूने जो दी हमें, प्यार करने की सजा,
बफा रही ना बन्दगी ,ये सब तुझको पता।
एक बार तो पीछे मुड़कर हँस के देखा होता,
तेरा प्यार कौन-सी, यातना सहता होगा॥
तबसे थी सोच ऐसी,
ये कौन बदलता चला गया,
खाली किताब के पन्ने,
ये कौन भरता चला गया॥
वक्त की लड़ाई हमसे ,
तू रूठती क्यूं चली गयी।
जब मनाने की ठनी तो,
क्यों तू सिमट सी गयी॥
अब और बात है,
ये कौन कहता चला गया।
खाली किताब के पन्ने,
ये कौन भरता चला गया॥

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