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मैं इनका मुरीद

भारत माँ के वीर पुत्र

Kumar Siddharth

4 कविताएं

17 Views
पढ़ते तो होंगे आप बहुत मोहब्बत की शायरी
आज तो खोलिए शहीद जवानों की भी डायरी

सरहद की माटी पर जो सीना ताने लेटे हैं
वो कोई गैर नहीं भारत माँ के बेटे हैं

जान हथेली पर रखकर अपनी
सर पर अपने तिरँगा लपेटे है

देशप्रेम से जो उनको जोड़े हुए है
सरहद पर वो कफ़न ओढ़े हुए हैं

क्या बीतती होगी उनको घर वालों के अन्दर
जब लौट आता है बेटा घर बनकर सिकन्दर


आज भी कई घाटों पर उनका शरीर दफ़न है
भारतीय जवानों के लिए तिरंगा ही कफ़न है

दुश्मनों की जवानों के सामने गलती नहीं दाल है
देश के लिए शहीद हो जाते भारत माँ के लाल हैं

इनकी वजह से हम लोग घर पर चैन से सोते हैं
इनके घर वाले इनकी खातिर पल पल रोते हैं

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