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'ज़मीन' पर चुनिंदा शेर

काव्य चर्चा

'ज़मीन' पर चुनिंदा शेर

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बहुत ज़मीन बहुत आसमाँ मिलेंगे तुम्हें 
प हम से ख़ाक के पुतले कहाँ मिलेंगे तुम्हें
- फ़रहत एहसास

किसी की बात कोई बद-गुमाँ न समझेगा
ज़मीं का दर्द कभी आसमाँ न समझेगा
- इमाम आज़म
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