शब्द-भाव से दूसरों की पीड़ा व्यक्त करते युवा कवि-गीतकार दीपक रमोला 

दीपक रमोला
                
                                                             
                            अमर उजाला काव्य और वाणी प्रकाशन के बैनर तले पुस्तक मेले में आयोजित कविता कुंभ में युवा कवि और गीतकार दीपक रमोला ने भी शिरकत की। यहां उनकी नवीन किताब इतना तो मैं समझ गया हूं का विमोचन हुआ। नायाब प्रतिभा के धनी रमोला ने अमर उजाला काव्य से मुलाकात में कहा कि वह शब्द भाव से दूसरों की पीड़ा व्यक्त करने को की सृजन कहते हैं। दीपक रमोला ने अमिताभ बच्चन अभिनीत फिल्म वजीर का अतरंगी यारी गीत लिखकर प्रसिद्ध‌ि पाई थी।  
                                                                     
                            

देहरादून में पले बढ़े दीपक रमोला की राय है कि जब आप भाव और शब्दों से दूसरों की पीड़ा व्यक्त करने में समर्थ हो जाते है तब आप कुछ नया करते हैं। और यहीं दूसरों के लिए एक नई प्रेरणा हो सकती है। रमोल कहते हैं कि यह कला आप में और दूसरे में भी नए उत्साह का संचार करती है। दीपक कहते हैं उन्होंने सबसे पहली क‌विता 12 साल की उम्र में लिखी। दीपक स्कूल में वाद-विवाद के दौरान अक्सर कवियों की पंक्तियां गुनगुनाते थे। तब हिंदी की शिक्षिका ने और कविता लिखने की ओर उत्साहित किया। इसके बाद मेरी 4 लाइन की कविता कब 8, 12, और 16 लाइन की हो गई तथा बाद में पुस्तक बन गई। आगे पढ़ें

मुझे लगता था कि मेरे शब्दों को कोई धुन में बांधे...

3 years ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X