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Waseem barelvi shayari

काव्य चर्चा

वसीम बरेलवी के मुशायरों से चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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शायरी के चहेतों के लिए वसीम साहब का नाम ही काफ़ी है और उन्हें सुनने वालों की भीड़ लग जाती है। पेश हैं उनके मुशायरों से चुनिंदा शेर

लहराती बलखाती चिड़िया हवा से कहती लगती है
उड़ने पर आओ तो दुनिया कितनी छोटी लगती है


मुझको गुनहगार कहे और सजा न दे
इतना भी इख़्तियार किसी को ख़ुदा न दे

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