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 top 10 sher on nazar, valentine special

काव्य चर्चा

इश्क में नज़रों को बयां करते हैं ये 10 बड़े शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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इश्क़ की रहगुज़र नज़रों से शुरू होती है, इसलिए किसी से निगाह मिलाने से पहले ज़रूरी है कि दिल को संभाल कर रखा जाए। लेकिन बावजूद लाख कोशिशों के इन अचूक खंजर का असर ऐसा होता है कि घायल दिल के पास सिवाय मुहब्बत के कोई ओर दवा नहीं बचती। निगाहों में अजनबी को शैदाई बनाने की वो तासीर होती है जिससे बच निकलना नामुमकिन ही है। उस पर भी जब आप अफ़साना-नवीस हों तो इन निगाहों पर शेर-ओ-शायरी की इबारतें तैयार की जा सकती हैं।
पढ़िए ऐसे ही कुछ शेर जो नज़रों की ख़ासियत पर ख़ास लिखे गए हैं।  

आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो
नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है
- जाँ निसार अख़्तर

अब आएँ या न आएँ इधर पूछते चलो
क्या चाहती है उन की नज़र पूछते चलो
- साहिर लुधियानवी
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अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का...

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