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'तकरार' और 'नाराज़गी' पर कहे गये बेहतरीन शेर

काव्य चर्चा

'तकरार' और 'नाराज़गी' पर कहे गये बेहतरीन शेर

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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फूल कर ले निबाह काँटों से 
आदमी ही न आदमी से मिले 
- ख़ुमार बाराबंकवी

जब मुलाक़ात हुई तुम से तो तकरार हुई
ऐसे मिलने से तो बेहतर है जुदा हो जाना
- अहसन मारहरवी

सिर्फ़ नुक़सान होता है यारो
लाभ तकरार से नहीं होता
- महावीर उत्तरांचली आगे पढ़ें

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