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Shayari while finding address

काव्य चर्चा

कभी अपना तो कभी माशूक का पता ढूंढ़ते हैं शायर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपनी ही दुनिया में खोए शायर कितनी दफ़ा अपना पता खोजते हैं तो कभी अपनी माशूकाओं का। इसी पर उन्होंने कई अल्फ़ाज़ भी कहे है


कोई मुझ तक पहुँच नहीं पाता
इतना आसान है पता मेरा
- जौन एलिया


मिरे बग़ैर कोई तुम को ढूँडता कैसे
तुम्हें पता है तुम्हारा पता रहा हूँ मैं
- सरफ़राज़ नवाज़ आगे पढ़ें

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