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Shayari on crowd

काव्य चर्चा

ज़माने की 'भीड़' पर शायरों के अल्फ़ाज

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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शायरों का दिल भीड़ में भी ख़ुद को तन्हा ही पाता है। ज़माने से अलग क्या कहते हैं उनके अल्फ़ाज़ जानें इन शायरी के साथ 

भीड़ में तन्हा रहने का
ज़हर हमेशा पीता हूँ
- मुजाहिद फ़राज़

अपनी पहचान भीड़ में खो कर
ख़ुद को कमरों में ढूँडते हैं लोग
- शीन काफ़ निज़ाम

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