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shayari for home

काव्य चर्चा

ये शेर उन लोगों के लिए हैं जो अपने घर से दूर रहते हैं

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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घर छोड़कर किसी और जगह पर रहना इच्छा तो कतई नहीं होती, मजबूरी ही होती है। इसलिए घर की याद भी हमेशा सताती रहती है। मौका ख़ूशी का हो या ग़म का घर जाने का मन करता है। इसलिए शायरों ने भी इस पर ख़ूब अल्फ़ाज़ कहे हैं।


अपना घर आने से पहले
इतनी गलियाँ क्यूँ आती हैं
- मोहम्मद अल्वी  

अब घर भी नहीं घर की तमन्ना भी नहीं है
मुद्दत हुई सोचा था कि घर जाएँगे इक दिन
- साक़ी फ़ारुक़ी

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