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Shakh shayari collection

काव्य चर्चा

'शाख़' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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शाख़-दर-शाख़ तिरी याद की हरियाली है
हम ने शादाब बहुत दिल का शजर रक्खा है
- सलीम फ़िगार


वो शाख़ बने-सँवरे वो शाख़ फले-फूले
जिस शाख़ पे धूप आए जिस शाख़ को नम पहुँचे
- ज़िया जालंधरी

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