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वह परेशानियों और तकलीफ़ों सहजता ख़ोज लेने वाला शायर...

काव्य चर्चा

परेशानियों और तकलीफ़ों में सहजता ख़ोज लेने वाला शायर- शाद अज़ीमाबादी

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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'हज़ार शुक्र कि मुद्दत में यह असर आया
लिया जो नाम तेरा दिल में तू उतर आया' 


यह शेर ज़िंदगी को सरलता में देखने वाले 'शाद' अज़ीमाबादी का है। वह परेशानियों और तकलीफ़ों पर रोने और ग़मज़दा रहने के बजाए उनमें सहजता ढूंढ लेते थे। 1846 में पैदा हुए 'शाद' अज़ीमाबाद (पटना सिटी) के रहने वाले थे। उनका मूल नाम सैयद अली मुहम्मद था। वह एक बुलंद मर्तबे के शायर थे।

भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित शेर-ओ-सुख़न संग्रह में अयोध्याप्रसाद गोयलीय लिखते हैं, "वे ख़्वाजा मीर 'दर्द' की शिष्य परम्परा में हुए हैं। अत: आपके कलाम में भी वही असर नज़र आता है। कहीं-कहीं तत्कालीन लखनवी रंग की भी झलक मारती है। आप मीर 'अनीस' से भी काफ़ी प्रभावित नज़र आते हैं। शाद देहलवी-लखनऊ ज़बान के क़ायल नहीं थे। यही कारण है कि उनके कलाम में यत्र-तत्र मुहावरों और शब्दों का प्रयोग उक्त स्थानों की परम्परा से भिन्न हुआ है।"
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