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 ravindra nath tagore poetry collection on amar ujala kavya

काव्य चर्चा

सुनो दीपशालिनी, रवींद्रनाथ ठाकुर के 5 सुनहरे गीत...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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विश्व कवि रवींद्रनाथ ठाकुर की कविताओं में प्रेम का मधुर भाव पूरी कोमलता और सहजता के साथ समाया हुआ है। शब्दों के करारे प्रहार उनके काव्य में कहीं नहीं दिखते। उनका काव्य ऐसा है मानो सरल शब्द फूल बनकर भावों के समंदर में लहरा रहे हैं। काव्य चर्चा में हम गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के गीत वितान कविता संग्रह से कुछ कविताएं पाठकों के समक्ष रख रहे हैं। 

सुनो दीपशालिनी... 

द्वार थपथपाया क्यों तुमने ओ मालिनी 
पाने को उत्तर, ओ किसने क्‍या मालिनी 
फूल लिए चुन तुमने, गूंथी है माला 
मेरे घर अंधकार, जड़ा हुआ ताला 
खोज नहीं पाया पथ, दीप नहीं बाला

आई गोधूलि और पूंछती सी रोशनी 
डूब रही स्वर्णकिरण अंधियारी में सनी 
होगा जब अंधकार आना तब पास में 
दूर कहीं पर प्रकाश जब हो आकाश में 

पथ असीम, रात घनी, सुनो दीपशालिनी 
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चुप चुप रहना सखी, चुप चुप ही रहना...

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