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रसखान और ब्रज प्रेम

काव्य चर्चा

ब्रज भाषा विशेष: रसखान की प्रेम वाटिका और उसके दोहे... 

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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ब्रजभाषा के प्रमुख स्तंभ रसखान का कृष्ण प्रेम जग प्रसिद्ध है। कृष्ण को आराध्य मानते हुए रसखान ने प्रेम और विरह पर सवैये, दोहे और अन्य पद्यों की रचना की है। रसखान का जन्म सन् 1548 में हुआ माना जाता है। उनका मूल नाम सैयद इब्राहिम था और वे दिल्ली के आस-पास के रहने वाले थे। कृष्ण-भक्ति ने उन्हें ऐसा मुग्ध कर दिया कि गोस्वामी विट्ठलनाथ से दीक्षा ली और ब्रजभूमि में जा बसे। सन 1628 के आस पास उनकी मृत्यु हुई।

प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोई।
जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोई॥

कमल तंतु सो छीन अरु, कठिन खड़ग की धार।
अति सुधो टढ़ौ बहुरि, प्रेमपंथ अनिवार॥ आगे पढ़ें

सुद्ध कामना ते रहित

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