आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Kavya Charcha ›   ramdarash mishra best hindi poems based on winter season
सर्दी के थरथराते दिन और रामदरश मिश्र की चुनिंदा कविताएं...

काव्य चर्चा

'सर्दी के थरथराते दिनों' पर पढ़िए रामदरश मिश्र की चुनिंदा कविताएं...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

869 Views
रामदरश मिश्र जितने समर्थ कवि हैं उतने ही समर्थ उपन्यासकार और कहानीकार भी। इनकी लंबी साहित्य-यात्रा समय के कई मोड़ों से गुजरी है। इनकी रचनाधर्मिता नित नई ऊचाइयों को प्राप्त होती गई। सर्दी का मौसम है और ठंड अपने चरम पर है। प्रस्तुत है 'सर्दी' पर रामदरश मिश्र की चुनिंदा कविताएं- 


नवंबर के उत्सवगंधी प्यारे-प्यारे गुनगुने दिन
दिसंबर के दिन बन गये-
शत से थरथराते हुए

मैं अपना मकान बनवा रहा था
तो काफी जगह खाली छोड़ दी थी-
धूप के लिए, हवा के लिए, पेड़ पौधों के लिए
मेरे कुछ वणिकमना हितैषियों ने
मुझे धिक्कारा था-
”यह क्या किया तुमने
इतनी खाली जगह में कई कमरे बन गए होते
काफी किराया मिलता“
मेरा गाँव-मन हँस कर रह गया था आगे पढ़ें

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!