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मोहब्बत में चोट खाए क़तील के शेर...

काव्य चर्चा

मोहब्बत में चोट खाए क़तील के शेर...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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क़तील को पढ़ने के बाद आपको शब्दों का ऐसा सहारा मिल जाता है कि आप अपने नज़दीकी और निजी रिश्तों में जब भी अभिव्यक्ति की मुश्किलों से गुजरेंगे तो क़तील के क़लामों से मदद मिल जाएगी।  'चंद्रकांता' नाम की फिल्म अभिनेत्री से क़तील साहब का प्रेम था और यह प्रेम बहुत कम समय तक चला। साल-डेढ़ साल में ही टूट गया। लेकिन इसके बाद उनकी शायरी में भी बदलाव आया। कोई शायर मोहब्बत में रहते हुए जितना शायराना होता है यकीन मानिए कि वह चोट खाने के बाद उससे अधिक हो जाता है, और जख्मी दिल अपने जज़्बातों को जब शायरी में ढालता है तब उसका दूसरा पक्ष सामने आता है-  

दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं 
लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं 

खुला है झूट का बाज़ार आओ सच बोलें 
न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें 

हमें भी नींद आ जाएगी हम भी सो ही जाएँगे 
अभी कुछ बे-क़रारी है सितारो तुम तो सो जाओ 

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