आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Kavya Charcha ›   Poetry on Ramrajya
अवमूल्यन के दौर में रामकाव्य की यादें...

काव्य चर्चा

अवमूल्यन के दौर में रामकाव्य की यादें...

सेवाराम त्रिपाठी, रीवा

432 Views
रामकाव्य का परिप्रेक्ष्य बहुत बड़ा है और उत्तरदायित्व तो और भी बड़ा। मानवीय मूल्यों का क्षेत्र बहुत विशाल है। रामकाव्य का तो कहना ही क्या? इसका एरिया इतना विस्तृत है कि इसे ज्यादा संपूर्णता से खोजना कठिन है; फिर भी कुछ नया जोड़ना भी कम महत्त्वपूर्ण नहीं है। मैं सोच रहा था, पिष्टपेषण न हो। कुछ चीज़ें, कुछ बातें हमें चौंकाती हैं। हम अपने युग से और समय से आँख मूँदकर हवा में बातें नहीं कर सकते। करेंगे तो इन पर विमर्श झूठा ही होगा; जैसे— कभी तुलसीदास जी ने कहा था—

 "झूठइ लेना झूठइ देना
  झूठइ भोजन झूठ चबेना।" 
आगे पढ़ें

सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!