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परवीन शाकिर: आरज़ू का एक और नाम...v

काव्य चर्चा

परवीन शाकिर: आरज़ू का एक और नाम...

शीबा राकेश, लखनऊ 

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24 नवम्बर, 1952 में जन्मी परवीन शाकिर उर्दू शायरी में एक जाना माना नाम है। वर्जनाओं से भरे समाज में उन्होंने भावनाओं से भरी कलम को चुना और इसकी स्याही का रंग स्त्रीत्व के गुलाल से रंगा था। 

कमोबेश, अपनी हर रचना में उन्होंने स्त्री मन के कोमल पक्ष को बेहद नफासत और खूबसूरती से सामने रखा। जज्बात चाहे एक मां के हो, या एक साधारण लड़की के या फिर विरह में तड़पती एक प्रेमिका के हो, या घर बार के पवित्र बंधन में बंधी एक पत्नी के,  बात एक कामकाजी स्त्री की हो या फिर इससे इतर कोई किरदार, उन्होंने इन सबको अपनी कलम के लिये चुना।  परवीन शाकिर ने अपनी बात जिस बेबाकी से रखी वही उनकी खासियत बनी। गौरतलब है, कि जिस समाज में स्त्री के शब्द या उसकी मानसिक अथवा शारीरिक जरूरतें, केवल पुरूषों के कलम में लगी आंखों की मोहताज रही हो, वहां इस तरह बेबाक कलम चलाना गजब का साहस है। आगे पढ़ें

शाकिर की शायरी...एक नयी दिशा...

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