ज़िन्दा रिश्तों के शायर निदा फ़ाज़ली के चुनिंदा अशआर...

ज़िन्दा रिश्तों के शायर निदा फ़ाज़ली के चुनिंदा अशआर...
                
                                                             
                            निदा फ़ाज़ली तरक़्क़ी पसंद रिवायत का हिस्सा थे। उन्होंने अपनी शायरी में रूढ़िवादी परंपराओं से इंहराफ़ कर एहसासों को इस सलीक़े से अपने अशआर में पिरोया है कि उनकी शायरी जीवंत हो उठती है और भेदभाव ख़त्म हो जाते हैं। नज़रों के सामने एक समान आकृतियां उभरने लगती हैं। इसीलिए उन्हें अदब व शायरी में ज़िन्दा रिश्तों का शायर कहा जाता है। रिश्तों का ज़िक्र करते हैं तो उनके उतार-चढ़ाव, और नज़ाकतों को बयान करना नहीं भूलते। 
                                                                     
                            

बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता 
जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता 

हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए 
कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए 
आगे पढ़ें

1 month ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X