आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Kavya Charcha ›   Nazeer Akbarabadi ghazal famous ghazal dil yar ki gali men kar aram rah gaya
Nazeer Akbarabadi

काव्य चर्चा

नज़ीर अकबराबादी: दिल यार की गली में कर आराम रह गया

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

2537 Views
नज़ीर अकबराबादी उर्दू में नज़्म लिखने वाले पहले कवि माने जाते हैं। इनका जन्म आगरा में 1735 को हुआ था। समाज की हर छोटी-बड़ी ख़ूबी नज़ीर साहब के यहां कविता में बदल गई। पूरी एक पीढ़ी के तथाकथित साहित्यालोचकों ने नज़ीर साहब को आम जनता की शायरी करने के कारण उपेक्षित किया। ककड़ी, जलेबी और तिल के लड्डू जैसी वस्तुओं पर लिखी गई कविताओं को लोग कविता मानने से इनकार करते रहे। 

वे उनमें सब्लाइम एलीमेन्ट जैसी कोई चीज़ तलाशते रहे जबकि यह मौला शख़्स सब्लिमिटी की सारी हदें कब की पार चुका था। बाद में नज़ीर साहब के जीनियस को पहचाना गया और आज वे उर्दू साहित्य के शिखर पर विराजमान चंद नामों के साथ बाइज़्ज़त गिने जाते हैं। अकबराबादी का इंतक़ाल 1830 को हुआ। 

पेश है नज़ीर का यह कलाम- 

दिल यार की गली में कर आराम रह गया 
पाया जहां फ़क़ीर ने बिसराम रह गया 

किस-किस ने उस के इश्क़ में मारा न दम वले 
सब चल बसे मगर वो दिल-आराम रह गया 

जिस काम को जहां में तू आया था ऐ 'नज़ीर' 
ख़ाना-ख़राब[1] तुझ से वही काम रह गया 

1.बर्बाद, ख़ुद को बर्बाद करने वाला
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!