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Mirza Ghalib philosophical shayari collection

काव्य चर्चा

मिर्ज़ा ग़ालिब के ‘फ़िलोसॉफ़िकल’ शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना


आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

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