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मीना कुमारी

काव्य चर्चा

मीना कुमारी के 10 शेर....

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हिन्दी सिनेमा की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी ने 31 मार्च 1972 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया था।  कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी के अदाकारी के साथ एक शायराना मिज़ाज भी रखती थीं।  जब उनकी शायरी दुनिया के सामने आई तब लोगों को उनके इस हुनर का पता चला और उनके प्रशंसकों की दीवानगी बढ़ती चली गई। 1 अगस्त, 1932 को महज़बीन जो आगे चलकर मीना कुमारी के नाम से मशहूर हुईं, इस दुनिया में आयी थीं। पिता की बेकारी और मां की लाचारी ने महज़बीन को अनाथालय की सीढ़ियों तक पहुंचा दिया, लेकिन मां-बाप तो मां-बाप होते हैं, बच्ची रोई तो गरीब पिता का मन भर आया और वापस दौड़कर बेटी को गले से लगा लिया और किसी तरह परवरिश की। ये परिस्थितियां मीना कुमारी के जीवन में लंबे समय तक बनी रहीं। और इस तरह की स्थितियां ही एक असाधारण अभिनेत्री के मन में कलमकारी की जिद पैदा कर ही थीं। उनकी कुछ शायरी देखिये- 

आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता

हंसी थमी है इन आंखों में यूं नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह आगे पढ़ें

...चुभें कांच के ख़्वाब

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