अगर लॉकडाउन में होते ये शायर तो क्या शेर कहते

lockdown days shayari collection
                
                                                             
                            

हो न मायूस ख़ुदा से 'बिस्मिल'
ये बुरे दिन भी गुज़र जाएंगे
- बिस्मिल अज़ीमाबादी


कितने लोगों से मिलना-जुलना था
ख़ुद से मिलना भी अब मुहाल हुआ
- मनीश शुक्ला

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8 months ago

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