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lockdown days shayari collection

काव्य चर्चा

अगर लॉकडाउन में होते ये शायर तो क्या शेर कहते

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हो न मायूस ख़ुदा से 'बिस्मिल'
ये बुरे दिन भी गुज़र जाएंगे
- बिस्मिल अज़ीमाबादी


कितने लोगों से मिलना-जुलना था
ख़ुद से मिलना भी अब मुहाल हुआ
- मनीश शुक्ला

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