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जोश मलिहाबादी

काव्य चर्चा

जोश मलीहाबादी यानि तेवर वाला शायर !

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया,
जब चली सर्द हवा मैंने तुझे याद किया।
 
इसका रोना नहीं क्यों तुमने किया दिल बरबाद,
इसका ग़म है कि बहुत देर में बरबाद किया।
 
मुझको तो होश नहीं तुमको ख़बर हो शायद
लोग कहते हैं कि तुमने मुझे बरबाद किया।

 
गुलाम अली की खनकती आवाज में ये ग़ज़ल आप जितनी बार सुनेंगे, कानों के तार-तार बजने लगेंगे, और अगर शेरो-शायरी का शौक रखते हैं तो 'जोश' साहब जरूर याद आएंगे।जी हाँ, जोश मलीहाबादी साहब ! वही जोश मलीहाबादी जिन्होंने अपनी क्रांतिकारी नज़्मों से अंग्रेज सरकार की खटिया खड़ी कर दी थी।

अक्सर होता ये है कि जब आप कोई गीत सुन रहे होते हैं तो उसकी धुनों में खोए रहते हैं। लेकिन जिन शब्दों को आप सुन रहे होते हैं, गुनगुना रहे होते हैं, उन शब्दों के कलमकार की तरफ जब ध्यान जाता है तब आपको उस  रचनाकार के तेवर का पता चलता है। जोश मलीहाबादी साहब ऐसे ही शायर हैं। तेवर वाले शायर !  आगे पढ़ें

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