स्मृति शेष: जयशंकर प्रसाद के काव्य से चुनिंदा पंक्तियां

जयशंकर प्रसाद
                
                                                             
                            
हिन्दी साहित्य के छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक जयशंकर प्रसाद ने साहित्य को कामायनी, झरना, आंसू जैसे काव्य संग्रह दिए हैं साथ ही स्कंदगुप्त जैसा नाटक भी दिया है। पेश हैं उनके काव्य संग्रह से चुनिंदा पंक्तियां


आह ! वेदना मिली विदाई 

चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर
प्रलय चल रहा अपने पथ पर
मैंने निज दुर्बल पद-बल पर
उससे हारी-होड़ लगाई

लौटा लो यह अपनी थाती
मेरी करुणा हा-हा खाती
विश्व! न सँभलेगी यह मुझसे
इसने मन की लाज गँवाई

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दो बूँदें

2 years ago
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