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International day of peace shayari

काव्य चर्चा

विश्व शांति दिवस - विश्व में शांति का महत्व दर्ज कराते हुए शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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जब विश्वास अंधविश्वास में परिवर्तित हो जाए और कल्याण का स्थान स्वार्थ ले ले तो वहां दूसरों के लिए घृणा पनपने लगती है। विश्व में राजनीतिक द्वेषों ने इस घृणा को और बढ़ावा ही दिया है। परमाणु युग के इस समय में हमें आवश्यक है कि लोगों से शांति की अपनी की जाए। सद्भाव, अहिंसा, भाईचारे और इंसानियत के पाठ पढ़ाए जाएं ताकि आने वाली नस्लों को जीने के लिए एक बेहतर जगह मिल सके। शायरों के कहे ये अल्फ़ाज़ इन्हीं अच्छाईयों की तस्दीक करते हैं।


मेरा मज़हब इश्क़ का मज़हब जिस में कोई तफ़रीक़ नहीं
मेरे हल्क़े में आते हैं 'तुलसी' भी और 'जामी' भी
- क़ैशर शमीम


ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम 'अमीर'
सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
- अमीर मीनाई

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