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इंकलाब शायरी और भगत सिंह का जन्मदिन

काव्य चर्चा

भगत सिंह जयंती और 'इंकलाब' पर ये 10 बेहतरीन शेर....

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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शायर हो या कवि, अपनी शायरी और रचनाओं को जब ख़ुद से निकालकर सामाजिक चौराहों तक ले जाता है तब वह रचना लोगों के ज़बान पर चढ़ जाती है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक राष्ट्र की सरहदों पर तैनात फौजी जवानों के हौसला अफजाई में देशभक्ति से लबरेज शेरों और कविताओं/गीतों की बड़ी भूमिका रही है। आज के दिन देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगत सिंह की जन्मतिथि है। भगत सिंह को याद करते हुए पेश है 'इंकलाब' पर चुनिंदा शायरों के अल्फ़ाज़-

उस इंक़लाब की दस्तक सुनाई देती है
जो बस्तियों को मिटा देगा ज़लज़लों की तरह
- सैफ़ अली

देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़' 
कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़ 
- फ़िराक़ गोरखपुरी आगे पढ़ें

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