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Hindi poet shivmangal singh suman hindi kavita vardaan mangoonga nahin

काव्य चर्चा

शिवमंगल सिंह सुमन - वह कवि जिनकी कविता को तत्कालीन प्रधानमंत्री अक्सर सुनाते थे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य #हिंदीहैंहम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। इस कड़ी में आज कुछ बातें व विचार शिवमंगल सिंह सुमन की कविताई पर-  

क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संघर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही

शिवमंगल सिंह सुमन की लिखी इन पंक्तियों को भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अक्सर सुनाया करते थे। यहां तक कि कई लोग मानते रहे कि यह वाजपेयी की लिखी कविता है। शिवमंगल सिंह सुमन की कविताओं में प्रभाव था कि वह आम से लेकर ख़ास तक सभी को स्वयं से जोड़ सकें। हिंदी हैं हम श्रृंखला के अंतर्गत आज हम जानेंगे मूर्धन्य कवि शिवमंगल सिंह सुमन के बारे में। आगे पढ़ें

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