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hindi poem on environment

काव्य चर्चा

'ग्लोबल वार्मिंग' और ये 20 बड़े शेर...

अमर उजाला, काव्यडेस्क, नई दिल्ली

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ग्लोबल वार्मिंग का असर हमारी जीवन शैली पर आज के दौर का सबसे बड़ा सवाल। ग्लोबल वार्मिंग से हो रही जलवायु परिवर्तन को अगर समय पर न रोका गया तो जीवनदायिनी गंगा बाढ़ और तबाही ले आएगी। तापमान बढ़ता जाएगा। तमाम वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों ने चिंताएं जताई हैं। कविता या शायरी इशारे की कला है। इस विधा में बातें इशारों-इशारों में आएंगी। शेरों शायरी की श्रृंखला में आज पाठकों के लिए जो शेर हम प्रस्तुत कर रहे हैं उसमें भी पर्यावरण के प्रति चिंता महसूस की जा सकती है।


मैंने अपनी ख़ुश्क आंखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए
- राहत इंदौरी

अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
- बशीर बद्र
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बहुत ग़ुरूर है दरिया को

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