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Hindi diwas 2019 alankaar aur kavya

काव्य चर्चा

काव्य विशेष- हिंदी का श्रृंगार 'अलंकार'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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किसी भी काव्य के श्रृंगार के लिए उसमें अलंकार, समाम, रस, गुण आदि के पुट को सम्मिलित किया जाता है। जिससे वह काव्य और भी लयात्मक हो जाता है। आपने बचपन में ही अलंकार आदि पढ़े भी होंगे और याद भी किए होंगे। आइए हिंदी दिवस के मौके पर फिर से काव्य के माध्यम से उन्हें याद कर लेते हैं।

चारुचंद्र की चंचल किरणें खेल रहीं हैं जल थल में
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में


अक्सर इन पंक्तियों को हमने अनुप्रास अलंकार के उदाहरण के तौर पर पढ़ा है। दरअसल यह महाकवि मैथिलीशरण गुप्त की लिखी कविता का एक अंश है। इसमें च व ल की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है। आगे पढ़ें

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