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हरिशंकर परसाई

काव्य चर्चा

हरिशंकर परसाई-किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझको...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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हिंदी साहित्य के सबसे बड़े व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई जैसे कथाकार सदियों में पैदा होते हैं। देश, दुनिया और समाज की वास्तविकताओं को करीने की नजर से परोसने वाले परसाई का जन्म 22 अगस्त 1924 को हुआ था। निधन 10 अगस्त 1955 को हुआ। परसाई जी ने कुछ कविताएं भी लिखी। जिनमें मुख्य कविताएं इस प्रकार हैं...

किसी के निर्देश पर चलना नहीं स्वीकार मुझको
नहीं है पद चिह्न का आधार भी दरकार मुझको
ले निराला मार्ग उस पर सींच जल कांटे उगाता
और उनको रौंदता हर कदम मैं आगे बढ़ाता

शूल से है प्यार मुझको, फूल पर कैसे चलूं मैं? आगे पढ़ें

सिर धुनता रहे जो...

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