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Friendship shayari

काव्य चर्चा

दुश्मनी को दोस्ती में बदलते शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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शायरों का ज़हीन दिल कभी किसी से लम्बे समय तक दुश्मनी नहीं रख सकता। इसलिए उन्होंने कई ऐसे अशआर कहे जिससे अगर दुश्मनी भी हो तो वह दोस्ती में बदल जाए। 


दुश्मनी जम कर करो लेकिन ये गुंजाइश रहे
जब कभी हम दोस्त हो जाएँ तो शर्मिंदा न हों
- बशीर बद्र


दुश्मनी लाख सही ख़त्म न कीजे रिश्ता
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाते रहिए
- निदा फ़ाज़ली

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