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चुनावी मौसम, फ़साद और ये 10 चुनिंदा शेर...

काव्य चर्चा

चुनावी मौसम, फ़साद और ये 10 चुनिंदा शेर...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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अगर इंसान ना चाहे तो फ़साद की कोई वजह नहीं बनती, लेकिन ऐसा होता नहीं। इस जगत् में प्रेम और सौहार्द्र जितने सच हैं, उतना ही फ़साद और इंसानी फिरकापरस्ती भी। चुनावी मौसम है, कई तरह की रंजि़शें होती हैं जिसके चलते आए दिन फ़सादात होते रहते हैं, हालांकि यह ज़रूरी नहीं कि झगड़े-फ़साद चुनाव के समय ही हों, ये तो कभी भी हो सकता हैं। ये शेर ऐसे ही फ़सादों को बयां करते हैं। पेश है 'फ़साद' पर शायरों के अल्फ़ाज़-  

तुम अभी शहर में क्या नए आए हो 
रुक गए राह में हादसा देख कर 
- बशीर बद्र

कच्चे मकान जिनके जले थे फ़साद में
अफ़सोस उनका नाम ही बलवाइयों में था
- नईम जज़्बी आगे पढ़ें

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