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Farhat kanpuri shayari

काव्य चर्चा

ये हैं फ़रहत कानपुरी के ख़ास अशआर...

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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फ़रहत कानपुरी की जन्म 1905 ई. में कानपुर के एक प्रतिष्ठित कायस्थ परिवार में हुआ था। वह असहयोग आंदोलन में जेल भी जा चुके थे। बचपन से ही उनकी रुचि शायरी में थी। वह नज़्म, रूबाई, ग़ज़ल, क़िते आदि कहने में बहुत अच्छा अभ्यास रखते थे। फ़रहत के बिना उस समय कोई मुशायरा या गोष्ठी नहीं हुआ करती थी।

हर हाल में ख़ुश रहना, ख़ुश रहके अलम सहना
एक चीज़ ज़माने में फ़रहत की भी हस्ती है


तफ़रीह का सामान नहीं है कोई
तसकीन का इमकान नहीं है कोई
मरने का यहां ख़ौफ़ो-ख़तर है किसको,
जीने का अरमान नहीं है कोई

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