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तिरंगा

काव्य चर्चा

फ़ैज़ की पुकार... बोल, कि लब आजाद हैं तेरे

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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बोल, कि लब आजाद हैं तेरे
बोल, जबां अब तक है तेरी।
तेरा सुतवां जिस्म है तेरा
बोल, कि जां अब तक तेरी है।


अपनी हर नज्म से सोते हुए जमीरों को जगा देने वाले, इंकलाबी शायरी में उर्दू दुनिया के सबसे बड़े नामों में फैज अहमद फैज शामिल हैं। एक ऐसा शायर जिसका एक-एक शेर दबे-कुचलों की आवाज कई सालों से बना हुआ है। फैज ने अपनी गजलों और नज्मों के जरिए हमेशा हिन्दुस्तान, पाकिस्तान और तमाम उर्दू बोलने वालों के दिलों में अपनी अलग जगह बनाई है।
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