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Doodhnath Singh Noted Hindi poet author selected poem

काव्य चर्चा

कानों में बजता हुआ चुम्बन हूँ, उँगलियों की आँच हूँ : दूधनाथ सिंह

काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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दूधनाथ जी लंबे रचनाकर्म के दौरान जितने सहज, सरल रहे, उतने ही मुखर भी। मुखरता इस हद तक कि कई बार अपनी बात रखते हुए उन्होंने इसकी परवाह नहीं की कि उसका उनकी सेहत और संबंधों पर क्या असर होगा।

वह बतौर अध्यापक जहां अत्यंत लोकप्रिय रहे, वहीं पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी सफलतापूर्वक निर्वाह किया। साहित्य को जो कुछ दिया, उसके अतिरिक्त उनके सानिध्य में रचनाकारों की एक पूरी पीढ़ी तैयार हुई।

उनकी तीन कविता संग्रह भी प्रकाशित हैं। इनमें 'एक और भी आदमी है',  'अगली शताब्दी के नाम' और 'युवा खुशबू' है.  इसके अलावा उन्होंने एक लंबी कविता- 'सुरंग से लौटते हुए' भी लिखी है। आलोचना में उन्होंने 'निराला: आत्महंता आस्था', 'महादेवी', 'मुक्तिबोध: साहित्य में नई प्रवृत्तियां' जैसी रचनाएं दी हैं। नीचे उनकी 3 कविताएं हैं-

मैं तुम्हारी पीठ पर बैठा हुआ घाव हूँ
जो तुम्हें दिखेगा नहीं
मैं तुम्हारी कोमल कलाई पर उगी हुई धूप हूँ
अतिरिक्त उजाला –- ज़रूरत नहीं जिसकी
मैं तुम्हारी ठोढ़ी के बिल्कुल पास
चुपचाप सोया हुआ भरम हूँ साँवला
मर्म हूँ दर्पण में अमूर्त हुआ आगे पढ़ें

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