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Doha for swami vivekananda

काव्य चर्चा

स्वामी विवेकानंद के लिए लिखे गए दोहे- राम सनेही शर्मा 'यायावर'

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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उठो, जगो, आगे बढ़ो, पाओ जीवन-साध्य
तुमने कहा कि राष्ट्र ही, एकमेव आराध्य

साँस-साँस में राष्ट्रहित, शब्द-शब्द में ज्ञान
राष्ट्रवेदिका पर किए, अर्पित तन मन प्राण

सत्य और संस्कृति हुए, पाकर तुम्हें महान
कदम मिलाकर चल पड़े, धर्म और विज्ञान

देव संस्कृति का किया, तप-तप कर उत्थान
करता है दिककाल भी, ॠषि तेरा जयगान

अनथक यात्री ने कभी, लिया नहीं विश्राम
दिशा-दिशा के वक्ष पर, लिखा तुम्हारा नाम

रोम-रोम पुलकित हुआ, गाकर दिव्य चरित्र
जन्म तुम्हें देकर हुई, भारत भूमि पवित्र

संत विवेकानंद तुम, शुभ-संस्कृति का कोष
गुँजा दिया इस सृष्टि में, भारत का जय घोष


साभार- कविताकोश 

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