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तुम पतझड़ के उस पेड़ की तरह सुन्दर हो जो बिना पछतावे के पत्तियों को विदा कर चुका है...

काव्य चर्चा

तुम पतझड़ के उस पेड़ की तरह सुन्दर हो जो बिना पछतावे के पत्तियों को विदा कर चुका है...

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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7 नवंबर, 1936 को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में जन्मे चंद्रकांत देवताले की कविताओं में अदभुत राजनीतिक संवेदना समायी हुई है। उन्होंने अपनी कविता की कच्ची सामग्री मनुष्य के सुख दुःख से इकट्ठी की थी। 

बैतूल मध्य प्रदेश का वह स्थान है जो महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित है इसलिए उधर हिंदी और मराठी दोनों बोली जाती है, जाहिर है चंद्रकांत देवताले के रचना संसार में दोनों भाषाए मिलती हैं। आगे पढ़ें

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